‘नन्हे हीरो’ सूरज के सपनों का सहारा बने CMS राजेश सिंह, मदद से जगाई नई उम्मीद
रिपोर्ट,सुनील गुप्ता

गाजीपुर के सिकंदरपुर घाट की बहादुरी भरी कहानी एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार इस कहानी में एक नया नाम मजबूती से जुड़ गया है—सीएमएस (CMS) राजेश सिंह, जिन्होंने न सिर्फ इस नन्हे हीरो को सराहा, बल्कि उसके भविष्य को संवारने के लिए खुद आगे आए।
साल 2014 में महज 7 साल की उम्र में सूरज चौधरी ने पानी के भंवर में फंसे लोगों की जान बचाकर अद्भुत साहस का परिचय दिया था। उस दिन उसने अपनी जान जोखिम में डालते हुए 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि पिता अशोक चौधरी के साथ मिलकर कुल 12 जिंदगियां बचाई थीं। यह घटना आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।
वक्त के साथ सूरज बड़ा हुआ और अब वह अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा है। इंटरमीडिएट पास करने के बाद वह ग्रेजुएशन की तैयारी में जुटा है, लेकिन आर्थिक तंगी उसके रास्ते में बड़ी बाधा बनी हुई थी।
ऐसे में CMS राजेश सिंह ने एक सच्चे संरक्षक की भूमिका निभाते हुए बिना किसी दिखावे के सीधे सूरज के घर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। उन्होंने सूरज की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहयोग दिया और सबसे खास बात—उन्होंने इस मदद को प्रचार का माध्यम नहीं बनने दिया।
राजेश सिंह ने सूरज की बहादुरी की जमकर सराहना की और कहा कि इतनी कम उम्र में दिखाया गया साहस समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने सूरज को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
यह पहल सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक संदेश है—कि समाज में ऐसे लोग आज भी मौजूद हैं जो सच्चे हीरोज को पहचानते हैं और उनके सपनों को उड़ान देने के लिए आगे आते हैं।
सूरज की कहानी जहां साहस की मिसाल है, वहीं राजेश सिंह का यह कदम संवेदनशील नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया है।





