मनरेगा के नाम पर भ्रष्टाचार का भयंकर खेल: गाजीपुर में गरीब मजदूरों के हक़ पर डाका
गाजीपुर जिले के कासिमाबाद विकास खंड में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजना, जो गरीबों को रोजगार देने के लिए बनी है, अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहां फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी खजाने को खुलेआम लूटा जा रहा है। यह सब कुछ ग्राम प्रधान, सचिव और एपीओ की मिलीभगत से हो रहा है।
फर्जी हाजिरी का अनोखा तरीका: फोटो से फोटो, मोबाइल से मोबाइल
इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यहां मजदूर मौके पर जाते ही नहीं हैं। उनकी जगह फर्जी हाजिरियां लगाई जा रही हैं। खबर है कि मजदूर तो दूर, खेतों में काम भी नहीं हो रहा है। मोबाइल से एक तस्वीर खींचकर, उसे दूसरे फोन में ट्रांसफर कर दिया जाता है, और इसी तरह सैकड़ों मजदूरों की हाजिरी लगा दी जाती है। यह एक ऐसा तरीका है जो अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए अपनाया जा रहा है।
काम पहले ही बंद, हाजिरी अब लग रही है!
कई ग्राम सभाओं में तो काम पहले ही बंद हो चुके हैं, लेकिन कागजों पर मजदूरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसका एक उदाहरण राजापुर खुर्द ग्राम सभा में देखा गया, जहां नहर की घास की सफाई के नाम पर 100 मजदूरों की हाजिरी लगाई गई, जबकि काम बहुत पहले ही खत्म हो चुका था। इसी तरह सीउरी (129), आसन (70) और पाली (90) जैसी ग्राम सभाओं में भी फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है।

यह एक गंभीर अपराध है, क्योंकि यह सीधे-सीधे गरीब मजदूरों के हक़ पर डाका है। इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है, ताकि इस तरह के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके।





