मऊ: बिना अनुमति ‘सम्मान समारोह’ की आड़ में विभाग को ठेंगा, बद्रीनाथ की समाजसेवा पर भी उठे सवाल!
अब मंच पर दिखीं गैंगस्टर प्रकरण में घिरी अलका राय, संजीवनी हॉस्पिटल से लेकर घोशी मंच तक की ‘जर्नी’ चर्चा में
मऊ।
जनपद मऊ के मधुबन तहसील क्षेत्र में बीते दिन आयोजित एक सम्मान समारोह ने न केवल स्थानीय प्रशासन को झकझोर दिया है, बल्कि अब यह आयोजन बद्रीनाथ की तथाकथित समाजसेवा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस समारोह के मंच पर संजीवनी हॉस्पिटल मऊ की चर्चित चेहरा अलका राय भी नजर आईं—जो मुख्तार अंसारी की एम्बुलेंस कनेक्शन के कारण गैंगस्टर प्रकरण में नामजद रह चुकी हैं।
बिना अनुमति, विभागीय लापरवाही!
बताया जा रहा है कि “विधवा माता-भाभियों का सम्मान समारोह” नामक यह कार्यक्रम बद्रीनाथ द्वारा निजी खर्च पर आयोजित किया गया, लेकिन लाइव विभाग (लाल विभाग) से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई। नियमों को ताक पर रखकर मधुबन के आशीर्वाद पैलेस व होटल में कार्यक्रम कराया गया। सवाल यह उठता है कि जब किसी आम व्यक्ति द्वारा बिना अनुमति कार्यक्रम करने पर कार्रवाई होती है, तो बद्रीनाथ को यह छूट क्यों मिली?

बद्रीनाथ की मंशा या मंचबाज़ी?
बद्रीनाथ खुद को समाजसेवी बताते हैं और इस कार्यक्रम को “आत्मसम्मान का पर्व” कह रहे हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह एक सुनियोजित इमेज बिल्डिंग प्रोग्राम था। खास वर्ग की महिलाओं को चुनकर शॉल व स्मृति चिन्ह देना, कैमरों की चकाचौंध और सोशल मीडिया प्रचार—यह सब एक संभावित राजनीतिक पृष्ठभूमि की ओर इशारा करता है।
अलका राय की मौजूदगी से और गरमा गया मामला
इस पूरे आयोजन में अलका राय की उपस्थिति ने सियासी और सामाजिक गलियारों में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—
👉 क्या समाजसेवा की आड़ में आपराधिक इतिहास से जुड़े चेहरे भी अब मंच साझा करेंगे?
👉 क्या यह मंच अब “साफ छवि” से ज्यादा “सियासी समीकरण” का केंद्र बनता जा रहा है?
लाइव विभाग मौन, प्रशासन असहाय?
कार्यक्रम को लेकर न लाइव विभाग की कोई निगरानी दिखी, न अनुमति, और न ही कोई कार्रवाई। यह चुप्पी अब मिलीभगत की बू देने लगी है। आम जनता पूछ रही है कि जब नियम सब पर समान हैं, तो बद्रीनाथ और उनकी टीम पर अलग रवैया क्यों?





