गाजीपुर। जनपद के मनिहारी विकासखंड में मंगलवार को प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया। सुबह करीब 11:00 बजे तक खंड विकास अधिकारी (बीडीओ), पंचायत अधिकारी सहित कई कर्मचारियों की कुर्सियां खाली पाई गईं। कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों को जरूरी कार्यों के लिए इंतजार करना पड़ा, जिससे लोगों में नाराजगी देखने को मिली।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति नई नहीं है, अक्सर अधिकारी और कर्मचारी समय से कार्यालय नहीं पहुंचते, जिसके कारण विकास कार्यों में देरी होती है और योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता।
इस संबंध में जब मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार वैद्य से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो कॉल रिसीव नहीं हो सका।
वहीं दूसरी ओर, एमएलसी विशाल सिंह चंचल ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से मनिहारी के खंड विकास अधिकारी को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि ग्राम विकास से जुड़े कार्य किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होने चाहिए और सभी लंबित भुगतानों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि आगामी पंचायत चुनाव से पहले वर्तमान प्रधानों की कार्यशैली जनता के सामने बेहतर रूप में आ सके।
एमएलसी की सख्त हिदायत के बावजूद विकासखंड कार्यालय की यह स्थिति प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। एक ओर जनप्रतिनिधि विकास कार्यों में तेजी लाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की अनुपस्थिति से जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।
यदि यही हालात बने रहे, तो न केवल विकास कार्य बाधित होंगे, बल्कि जनप्रतिनिधियों द्वारा किए जा रहे प्रयास भी निष्प्रभावी होते नजर आएंगे।गाजीपुर। जनपद के मनिहारी विकासखंड से एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार सुबह लगभग 11:00 बजे तक विकासखंड कार्यालय में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ), पंचायत अधिकारी समेत कई अहम पदों की कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। हैरानी की बात यह रही कि दूर-दराज से आए ग्रामीण अपने काम के लिए घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी नदारद दिखे।
कार्यालय परिसर में मौजूद लोगों का कहना था कि यह कोई एक दिन की बात नहीं है, बल्कि यहां अक्सर यही स्थिति देखने को मिलती है। समय पर अधिकारी न आने से विकास कार्यों की फाइलें लंबित रहती हैं, भुगतान अटक जाता है और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय से नहीं पहुंच पाता। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
इस मामले में जब मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार वैद्य से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन लगातार बजता रहा लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर जिम्मेदारी तय कौन करेगा?
एमएलसी की सख्त चेतावनी भी बेअसर!
गौरतलब है कि हाल ही में एमएलसी विशाल सिंह चंचल ने एक सार्वजनिक मंच से मनिहारी के खंड विकास अधिकारी को खुली चेतावनी दी थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ग्राम विकास से जुड़े किसी भी कार्य में बाधा नहीं आनी चाहिए और सभी लंबित भुगतानों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए। उनका यह भी कहना था कि आगामी पंचायत चुनाव से पहले वर्तमान प्रधानों की कार्यशैली बेहतर दिखनी चाहिए, जिससे जनता का भरोसा बना रहे।
लेकिन जमीनी हकीकत एमएलसी की चेतावनी से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। कार्यालय में अधिकारियों की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि या तो निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, या फिर प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह ढीला पड़ चुका है।
विकास कार्यों पर पड़ रहा सीधा असर
मनिहारी विकासखंड में चल रही विभिन्न योजनाओं—मनरेगा, आवास, शौचालय, सड़क निर्माण—सभी पर इसका सीधा असर पड़ता दिख रहा है। भुगतान में देरी से मजदूरों और लाभार्थियों में असंतोष बढ़ रहा है। वहीं, प्रधानों की कार्यशैली भी प्रभावित हो रही है, जिससे गांवों में विकास की गति धीमी पड़ती जा रही है।





